हड़प्पा काल में स्थापत्य कला

हड़प्पा काल में स्थापत्य कला

स्थापत्य के क्षेत्र में हड़प्पा की तीन महत्वपूर्ण उपलब्धियां थी पक्की ईंटों से निर्मित भवन इंग्लिश बांड मेथड के आधार पर बनाए गए हैं। स्थापत्य के इतिहास में इंग्लिश बॉन्ड मेथड का यह पहला प्रयोग है। हड़प्पा युग दूसरी उपलब्धि थी फ्लैमिश बॉन्ड मेथड का प्रयोग । सीढ़ियों के निर्माण में विशेष रूप से इस पद्धति का प्रयोग किया गया है। हड़प्पा के स्थापत्य में कारवेलिंग मेथड का भी कई जगह प्रयोग हुआ है इस युग में नगर नियोजन की प्रणाली में आधारभूत तकनीकी समरूपता दिखाई पड़ती है उदाहरण स्वरूप हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो इन 2 नगरों में 640 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद भी नगर की वास्तु योजना में एकरूपता दिखाई पड़ती है।

English bond method

 भारतीय क्षेत्र में उत्खनन के प्रश्न पश्चात प्रकाश में आए धौलावीरा राखीगढ़ी एवं लोथल जैसे नगरों में भी वास्तु योजना में समरूपता दिखाई देती है, हालांकि भौगोलिक दशा विशेष के कारण स्थानीय स्तर पर भवन निर्माण में अलग-अलग सामग्रियों का प्रयोग किया गया है। कालीबंगा नामक स्थल जो अपेक्षाकृत शुष्क प्रदेश में स्थित है, वहां मिट्टी के ईटों का ही ज्यादातर प्रयोग हुआ है सुरकोटड़ा नामक नगर के दुर्गीकरण में पत्थरों का प्रयोग भी स्थानीय कारणों से हुआ है गुजरात भवन निर्माण के दृष्टिकोण से भारतीय क्षेत्र में बसा धौलावीरा नामक नगर सबसे महत्वपूर्ण है। अन्य नगरों की वित्तीय संपूर्ण नगर तीन भागों में विभाजित है इस नगर में वर्षा के जल को संरक्षित करने के लिए जलाशयों का निर्माण किया गया है धौलावीरा शहर में भी पत्थर को काटकर एक जलाशय का निर्माण किया गया है नगर में जल आपूर्ति के लिए भी उपयुक्त प्रणाली विकसित की गई थी इस नगर में भवनों के निर्माण में अच्छी तरह तरह से गैर गोल एवं अंग्रेजी के 8 अक्षर की भांति दिखने वाले स्तंभ आधारों का प्रयोग किया गया है।

हड़प्पा कालीन प्रमुख भवनों में आकार एवं वास्तु योजना की दृष्टि से मोहनजोदड़ो का गुजरात वृहत स्नानागार हड़प्पा मोहनजोदड़ो से प्राप्त अन्नगार तथा लोथल से प्राप्त मानव निर्मित बंदरगाह का प्रथम उदाहरण विशेष महत्व के हैं हड़प्पा काल में पकी मिट्टी के नालियों के साथ-साथ टेराकोटा टाइल्स का भी प्रयोग हुआ है।

Corbeling system